हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने शाही आसफी मस्जिद लखनऊ में नमाज़-ए-जुमआ के खुतबों में नमाज़ियों को तक्वा की नसीहत और नीमा शाबान की फ़ज़ीलत और हालात-ए-हाज़िरा पर रौशनी डालते हुए कहा कि आज हर शरीफ आदमी की ज़िम्मेदारी है कि वह इस्लामी जम्हूरीया-ए-ईरान का समर्थन करे।
मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने नमाज़ियों को तक्वा की नसीहत करते हुए कहा कि तक्वा का सबसे बड़ा दुश्मन हराम खाना है और हराम खानों में सबसे बड़ा हराम खाना इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का माल ग़स्ब करना, अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम की मिलकियत को ग़स्ब करना है।
दुआ ए कुमैल का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने नमाज़ियों को नसीहत की है की शब-ए-नीमा शाबान में दुआ-ए-कुमैल ज़रूर पढ़ें।
मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने दुआ-ए-कुमैल के पहले फ़क़रा "ऐ माबूद! मैं तुझ से सवाल करता हूँ तेरी रहमत के ज़रिए जो हर शय (चीज़) पर मुहीत है।को बयान करते हुए कहा कि सवाल यह है कि अल्लाह की वह रहमत जो हर चीज़ का इहाता किए है कौन है? तो ज़ियारत-ए-आले-यासीन में हज़रत वली-ए-असर इमाम ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ को अल्लाह की "रहमते वासेआ" बताया गया है।
मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने मज़ीद वज़ाहत करते हुए कहा कि बिहारुल अनवार में इमाम ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ की तौकी' (लिखित संदेश) "अना तिल्कुर रहमा" (मैं वह रहमत हूँ।) यानी वह वसी' रहमत जिस का ख़ुदा से सवाल किया जा रहा है वह हमारे मौला व आक़ा इमाम मेंहदी साहिबुज़्ज़मान अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ ही हैं।
किताब एहतेजाज में जनाब शेंख मुफ़ीद रहमतुल्लाह अलैहि के नाम इमाम ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ के ख़त का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह ख़त अगरचे शैख मुफ़ीद रहमतुल्लाह अलैहि के नाम है, लेकिन इस का मुख़ातिब हर ज़माने का शेख मुफ़ीद है। शेख मुफ़ीद रहमतुल्लाह अलैहि ने ज़िम्मेदारियों को अदा किया था।पैग़ाम अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम को दुनिया तक पहुँचाया था, बातिल का डट कर मुक़ाबिला किया था। सवाल यह है कि दौर-ए-हाज़िर में शेख मुफ़ीद कौन हैं? तो वह रहबरे मोअज़्ज़म आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई दाम ज़िल्लुहू,हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली सीसतानी दाम ज़िल्लुहू, मराजय ए इकराम हैं।
शेख मुफ़ीद रहमतुल्लाह अलैहि के नाम इमाम ज़माना अज्जलल्लाहु फरजहुश्शरीफ का ख़त का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने कहा कि जो विलायत से वाबस्ता होता है इज़्ज़त पाता है और जो विलायत से रुग़र्दानी करता है ज़लील व रुसवा होता है।
मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने खत के फ़क़रे "अल्लाह अपने नूर को तमाम करेगा चाहे मुशरिकों को बुरा लगे।को बयान करते हुए कहा कि दौर-ए-हाज़िर में दुश्मन प्रोपगैंडा कर रहा है कि रहबरे मोअज़्ज़म दाम ज़िल्लुहू छिप गए, जबकि आप कल ही मस्जिद जमकरान में गए। आप अहम फ़ैसले मस्जिद जमकरान से करते हैं, तो जिस के फ़ैसले मुसल्ले पर हों उसे कौन शिकस्त दे सकता है।
मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने यह बताते हुए कि यूरोप ने सिपाह-ए-पासदारान (ईरान की इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कॉर्प्स) को दहशतगर्दों (आतंकवादियों) की फ़हरिस्त में शामिल कर दिया है, कहा कि जिस सिपाह-ए-पासदारान ने दाइश (ISIS) जैसे दहशतगर्द का बे गुनाह का कत्ल किया है, यूरोप ने दहशतगर्दों को ख़त्म करने वाले उसी फ़ौज को दहशतगर्द क़रार दिया। इस से उन्होंने अपने चेहरे पर पड़ी हुई इंसानियत की नक़ाब को ख़ुद ही नोच दिया और अपनी हक़ीक़त दुनिया पर अयाँ कर दी।
आख़िर में मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने अपील करते हुए कहा कि हर शरीफ आदमी की ज़िम्मेदारी है कि वह इस्लामी जम्हूरीया-ए-ईरान का समर्थन करे। क्योंकि ग्रेटर इसराईल की सबसे बड़ी रुकावट इस्लामी जम्हूरीया-ए-ईरान है। अगर यह हक़ का मुहाज़ कमज़ोर पड़ा तो यह ज़ालिम सैहूनी पूरी दुनिया को अपना ग़ुलाम बना लेंगा।
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